वो इंसान ही क्या
खुद के लिए जिए
वो मुसाफिर ही क्या
जो राह तय कर सफर करे
वो ख्वाब ही क्या
मुमकिन सा लगे
वो चाहत ही क्या
जिसमें तड़प ना हो
वो मुहोब्बत ही वला क्या
जिसमें जुनून लावा ना बने
वो लावा जो दिल तो दूर
पत्थर तक पिघला दे
वो मौत ही क्या जिसका
गैरों को गम ना हो
वो योद्धा ही क्या
जो मौत से डरे
कफन सर सदा जिसके
रात औड के सो ले
#RAJJEकराखड़DE
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