हारने से मैं सिखता गया, और
फिर जीतना आदत सी बन गई ।
किसी को भले ही अपने से बहतर ना आंकना
पर कमजोर समझने की भूल कभी न करना ।
फतह मिले या न मिले,
जान चली जाए चाहे मैदान में,
पर भाग मत कभी खडना,
अंतिम श्वास तक लड़ना ।
हयात कभी तुझसे तो
कभी तूं उससे खेले ,
मज़े का अस्ल मतलब
क्या पूछते हो जनाब उनसे
किसी कोने में दो कश लगा बैठे,
पूछो उससे जमाने में जो
अपने ख्वाब की खातिर
जींद दांव लगा बैठे ।
- #RAJJEकराखड़DE
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